आसाराम बापू का जन्म दिन्

April 15, 2009

जन्मदिवस तो एक बहाना है……. साधक को अपने पीया से मिलाना है ……… गरीबो को अन्ना वस्त्र वितरण कराना है ……. हरी ॐ नाम की गंगा बहाना है ……. संसार को भक्तिमय बनाना है ……

कुछ खबरे सेवा सुवास की …….

हरि ओम.. नाम से गूंजा आकाश

Apr 14, 11:52 pm
संवाद सहयोगी, अमृतसर ; श्री योग वेदांत सेवा समिति अमृतसर की ओर से पूजनीय संत श्री आसाराम जी बापू के 69वें जन्म दिवस पर गोल बाग से विशाल शोभायात्रा निकाली गयी। शोभा यात्रा के दौरान एक सुसज्जित वाहन में संत श्री आसाराम बापू जी के चित्र स्वरूप का शहरवासियों द्वारा पुष्प वर्षा कर स्वागत किया। बैंड बाजों व ढोल की थाप पर शोभा यात्रा में शामिल श्रद्धालु प्रभु यश गायन कर रहे थे। हरि ओम, हरि ओम, हरि ओम की मधुरमय ध्वनि पर भक्तिरस में आत्मविभोर श्रद्धालु झूमते हुए नजर आए। शोभा यात्रा में 21 युवतियां सिर पर कलश धारण कर शोभायात्रा का नेतृत्व कर रही थी। शोभायात्रा में भगवान श्री राधा कृष्ण, श्री राम दरबार, शिवजी पार्वती सहित अन्य झांकियां आकर्षण का केंद्र थी। गोल बाग से शुरू हुई शोभा यात्रा हाथी गेट, हाल गेट, हाल बाजार, कटड़ा जैमल सिंह, चौक फव्वारा, आहलूवाला कटड़ा, गुरु बाजार, मजीठ मंडी, दाल मंडी, कटड़ा भाई संत सिंह सहित अन्य बाजारों से होते हुए मंदिर श्री दुग्र्याणा तीर्थ में संपन्न हुई। जहां गुरु जी की आरती उतारी गई। उपस्थित श्रद्धालुओं को प्रसाद बांटा गया।

चित्तौड़गढ़, 14 अप्रेल (प्रासं)। श्री योग वेदान्त सेवा समिति के तत्वाधान में संत आसाराम बापू के अवतरण दिवस के उपलक्ष में यहां हरीनाम संकीर्तन यात्रा का आयोजन किया गया।
बैण्ड बाजों के साथ यह यात्रा जूना बाजार में स्थित लक्ष्मीनाथ मंदिर से प्रारम्भ हो कर नगर के विभिन्न मार्गे से गुजरती हुई गांधीनगर पहुंच सम्पन्न हुई। यात्रा में शामिल आसाराम बापू के भक्तजन नाचते एवं झूमते हुए चल रहे थे। आयोजन के तहत बुधवार को यहां चिकित्सालय में मरीजों को फल वितरित किए जाएंगे एवं गोपाल गौशाला में गायों को चारा का वितरण किया जाएगा।

सागवाड़ा, 12 अप्रेल (प्रासं) ।  संत आसाराम बापु के 69 वें जन्मोत्सव को लेकर योग वेदान्त सेवा समिति की रविवार को आश्रम में कार्यक्रम तैयारी बैठक आयोजित हुई।
समिति के अध्यक्ष रमेश पाटीदार के अनुसार बैठक के बाद आयोजन को लेकर विभिन्न साधक दलों द्वारा अंबाड़ा, चिखली, नादिया, सरोदा, सामलिया, पादरड़ी, दीवड़ा, कोकापुर आदि गांवों में संपर्क किया गया। महंत भाईशकर पुरोहित ने बताया कि 14 अप्रेल को सागवाड़ा नगर में दोपहर 2 बजे हाथी, घोडो व ऊंट गाड़ियों के साथ भव्य संकिर्तन यात्रा निकाली जायेगी तथा 15 अप्रेल को आश्रम परिसर में आतिशबाजी की जायेगी व विशाल भण्डारा होगा।

ऐसी खबरे तो और भी बहुत है ………

संत अपने जन्मदिवस के बहाने भी जगत का कल्याण करते है …… और भगवद विमुख उसमे दोष दर्शन भी कर लेते है ….

उल्लू सूरज को क्या जाने ……….
धरती अम्बर को क्या जाने ……..
मुरख गीता को क्या जाने ……….

आनंद आनंद आनंद ………….


आसाराम बापू के हक में संतों द्वारा रैलियाँ

December 28, 2008

अमदावाद  – संत आसारामजी के अमदावाद गुरुकुल के दो बच्चों की मृत्यु और फिर छिन्दवाड़ा में एक के बाद एक बच्चे की मौत और सारे आरोप संत आसाराम बापू पर लगने से भारत भर में संतों के मन आहत हुए । कभी जयेन्द्र सरस्वती, कभी रामदेवजी, कभी अमरनाथ तो कभी संतों पर स्टिंग ऑपरेशन…. सभी निराधार ! आखिर अब आसाराम बापू!

आखिर कौन होता है इन सबके पीछे? कौन करता है यह घिनौना खेल? क्यों होते हैं प्रहार उन संतों पर, जो धर्म को ऊँचा उठा हुआ देखना चाहते हैं? इसमें चाहे ईसाई मिशनरियाँ हो, चाहे विदेशी ताकते हों या हो असामाजिक तत्त्व, पर जब भारत के संत जाग पड़ते हैं तो देश में नहीं, विदेश में नहीं, पूरे ब्रह्माण्ड में हाहाकार मच जाता है ।

आसारामजी बापू पर थोपे जा रहे आरोपों के विरुद्ध संत इकट्ठे होने आरम्भ हो गये हैं । क्या मुंबई, क्या हरिद्वार संत समुदाय आसारामजी बापू के हक में रैलियाँ निकाल रहे हैं । संतों का कहना है कि भारतीय संस्कृति पर प्रहार करने वालो ! संतो पर राजनीति, छींटाकशी हम कभी भी बर्दाश्त नहीं करेंगे ।


संतों ने की आसाराम बापू के हक में महासभा

December 28, 2008

 

 मुंबई के आजाद मैदान में भारत जागृति मोर्चा की ओर से एक विशाल हिन्दू महासभा का आयोजन किया गया, जिसमें भारत के विभिन्न प्रांतों से देश के प्रमुख संतों ने आकर इस महासभा को जहाँ सम्बोधित किया, वहीं विभिन्न राजनेताओं ने भी इस महासभा को सम्बोधित करके इस बात पर बारम्बार जोर दिया कि बापू एक धार्मिक गुरु हैं, उन्हें तंत्र विद्या से कोई मतलब ही नहीं है । इस महासभा में जहाँ संतों ने संत आसारामजी बापू पर हो रहे झूठे आरोपों का खंडन कर दिया और घोषणा की कि बापू पर झूठे आरोप लगाकर देश के करोड़ों लोगों को मूर्ख बनाने वालों को अब सावधान होना होगा । देश के संतों का अपमान, नहीं सहेगा हिन्दुस्तान । वहीं साधुसमाज के रामनुजाचार्य विश्वेश प्रपन्नाचार्य सरस्वती जी ने बापू के प्रति अपनी संवेदना प्रकट करते हुए कहा किहिन्दू धर्म ही विश्व-धर्म है जिसकी संत रक्षा करते हैं । देखो, संतों की रक्षा के लिए इस महासभा को देखकर लगता है कि भारत जागृत हो गया है । कभी नरेन्द्र महाराज, कभी शंकराचार्य, कभी राम मन्दिर, कभी अमरनाथ मन्दिर तो कभी आसारामजी बापू को मुद्दा बना कर विदेशी ताकतें हिन्दुस्तान को खंड-खंड करने का सपना देख रही हैं, जिसे भारत का साधुसमाज हरगिज सहन नहीं करेगा ।

ऐसा पहली बार हुआ है जब एक दिन के लिए आयोजित हिन्दू महासभा को एक दिन और भी बढ़ाना पड़ा हो 


महेंद्र चावला की कहानी , आसाराम बापू के नाम पर कर रहा है कुप्रचार……

December 21, 2008

पानीपत । महेन्द्र चावला, जिसको कि पहले उसके असाधक जैसे गुणों के कारण आश्रम से निकाला गया था, बाद में पूज्य श्री नारायण साँईं ने दया करके अपने आश्रम में रखकर उसको सुधरने का मौका दिया था, वहाँ भी अपने गंदे स्वभाव के कारण न टिक सका और उसको अंततः वहाँ से भी निकाला गया था । आश्रम से निकलने के करीब तीन-चार साल बाद उसने कुप्रचार की ऑंधी में पैसों के लालच में षड्यंत्रकारियों से मिलकर मनगढ़ंत आरोपों की झड़ी मीडिया में प्रचारित कर दी थी । जबकि महेन्द्र चावला के भाइयों – श्री तिलक चावला, श्री देवेन्द्र चावला व श्री जितेन्द्र चावला से प्राप्त जानकारियों से हम हैरान हो गये । उनका कहना था कि ः 

महेन्द्र की 8वीं पास होने के बाद कुछ आदतें गलत हो गयी थीं । वह 9वीं कक्षा में भी व 10वीं में भी फेल हो गया था । घर की आर्थिक स्थिति ठीक न होने के बावजूद हमने उसे पढ़ाई के लिए पानीपत में अलग कमरे की व्यवस्था की । इतना दूध चाहिए, इतने बादाम चाहिए… इस प्रकार उसकी माँगें होती थीं । उधार के पैसे लेकर भी हमने उसे पढ़ाने-लिखाने की कोशिश की लेकिन इसने 12वीं के पेपर भी नहीं दिये । उसने हमारी नरमाई का बहुत गैरफायदा उठाया । 

श्री तिलक चावला ने आगे कहा कि महेन्द्र चोरियाँ करता था । एक बार घर से 7000 रुपये लेकर भाग गया था । एक हफ्ते तक घर से बाहर रहा । वापस आने पर बोला मेरा अपहरण हो गया था । कुछ लोग मुझे कार में जबरदस्ती बिठाकर ले गये थे । बाद में उसने स्वीकार कर लिया था कि उसने झूठ बोल दिया था । 

इसके बाद वह संत आसाराम बापू के आश्रम में गया । हमने सोचा आश्रम में जायेगा तो सुधर जायेगा । 

प्रेस की ताकत के यह पूछने पर कि फिर अब वह आश्रम के विरुध्द क्यों बोल रहा है ? उन्होंने कहा ः कुछ स्वार्थी असामाजिक तत्त्वों के बहकावे में आकर महेन्द्र कुछ-का-कुछ बक रहा है । इसे जरूर 10-15 लाख मिले होंगे । उसने हमसे एक बार कहा भी कि मैं 8-9 साल वहाँ रहा, मुझे रिटर्न क्या मिला ? तो हमने कहा कि आश्रमवालों ने एपोइंटमेन्ट लेटर दे के थोड़े ही बुलाया था तुमको ? नौकरी थोड़े ही करने गया था ? तू स्वयं ही सेवा करने गया था । नौकरी करनी थी तो यहाँ घर में ही कर लेता । जब तू छः महीने आश्रम में रहा, कुछ नहीं मिला तो क्यों रहा फिर अगले साल ? अगले साल कुछ नहीं मिला तब भी फिर क्यों आगे रहा ? 

नारायण साँईं के बारे में पूछने पर उन्होंने बताया कि नारायण साँईं के बारे में उसने जो अनर्गल बातें बोली हैं वे बिल्कुल झूठी व मनगढ़ंत हैं । हम साल में दो-तीन बार अमदावाद आश्रम में जाते हैं और लगातार महीने भर के लिए भी वहाँ रह चुके हैं लेकिन कभी ऐसा कुछ नहीं देखा-सुना । अभी जो उसके साथ है (अविन वर्मा) वह पहले क्यों नहीं बोली ? उसी समय निकलकर बोलती कि हमारे साथ ऐसा-ऐसा हुआ है । 

जब महेन्द्र इतने साल आश्रम में था तो अब तक क्यों नहीं दिखा उसे ? हमें भी क्यों नहीं बोला अब तक ? अभी एकदम क्यों ऐसा बोलना शुरू कर दिया ? वह सफेद झूठ बोल रहा है । 

उसके भाई देवेन्द्र चावला ने बताया कि जब हमने पहली बार अखबार में उसका नाम देखा तो हमने उसे बहुत समझाया कि यह काम बहुत गलत है। तू सारे परिवार की बेइज्जती क्यों करवा रहा है ? 

श्री तिलक चावला ने यह भी बताया कि आश्रम से आने के बाद अभी पिछले साल महेन्द्र के खिलाफ एफ.आई.आर. भी दर्ज हो गयी थी, क्योंकि यह किसीसे सामान लेकर आया था, उसके पैसे नहीं दिये थे, बड़ी मुश्किल से हम लोगों ने समझौता करवाया । एक बार तो महेन्द्र ने एक व्यक्ति की पीठ में स्टेपलर मार दिया, उसको पटककर मारा, जिस कारण उसके टाँके भी लगे। लेकिन उन लोगों ने हमारी वजह से इसको छोड़ दिया । 

जब हमने यह पूछा कि वह कह रहा है कि आश्रम में जो जाता है उसका दिमाग ही बदल जाता है तो तिलक चावला, जो कि महेन्द्र चावला के बड़े भाई हैं, ने कहा कि तीन करोड़ साधक ऐसे थोड़े ही गलत होते हैं ? ऐसे कैसे बोलेंगे तीन करोड़ साधक ? 

हमारे यह पूछने पर कि महेन्द्र बोल रहा है ‘नारायण साँईं ने उसकी प्रोपर्टी ले ली’ तब उसके बड़े भाई तिलक चावला ने कहा कि यह बात बिल्कुल झूठ है, क्योंकि वह जमीन महेन्द्र की थी ही नहीं, अगर होती तो पैसा तो घर से ही जाना था उसके पास पैसा था ही कहाँ ?

उन्होंने कहा कि महेन्द्र बोल रहा है मेरी जान को खतरा है, धमकी मिली है तो तिलक चावला ने कहा कि मैंने तो खुद ही कहा था कि तेरी जान को खतरा है तो बोडीगार्ड रख दूँ ? तो बोला नहीं । 

तिलक चावला ने आगे खुद ही बताया कि आश्रमवाले क्यों किसीको मारने की धमकी देंगे ? महेन्द्र के साथ चार-पाँच लोगों का गैंग है । दूसरों की आवाज निकाल के ”मैं नारायण साँईं बोल रहा हूँ, मैं फलाना बोल रहा हूँ, मैं ढिमका बोल रहा हूँ… मैं यह कर दूँगा, मैं वह कर दूँगा ।” ये सब लोग मिलकर पता नहीं क्या-क्या साजिश कर रहे हैं ? हमें तो यह डर है कि यह जिन लोगों के साथ मिला हुआ है वे इसे मरवा ही न दें ? 

अब पाठक स्वयं ही निर्णय करें जो खुद चोरियाँ करता रहा हो, अपहरण की कहानियाँ गढ़ता रहा हो, उससे किसी प्रकार के सच की उम्मीद किस प्रकार जा सकती है ?


जरा सोचिये ! जिनके लिए करोड़ों भक्त अपना सिर काटकर रख देने को तैयार हैं, ऐसे संत क्यों चुप हैं ?

December 21, 2008

 

हिन्दुस्तान (भारत) की भारतीय संस्कृति एक ऐसी विशाल संस्कृति है जिसने एक माँ की तरह सदा ही पूरे विश्व को पोषित किया है । ऐसी एक भारत की संस्कृति ही है जिसने समाज को शांति, आनंद और प्रेम, मितव्ययिता, संयम, सदाचार, माता-पिता का आदर व आपसी भाईचारे की भावना को पुष्ट किया है । भारत ही एक ऐसा देश है, भारतीय संस्कृति ही ऐसी संस्कृति है जिसने पूरे विश्व को सदा ही माँ की तरह प्रेम दिया है। भारत में हर धर्म, हर जाति, हर रंग के लोग आकर शांति पाते हैं, वात्सल्य पाते हैं । भारतीयों ने हमेशा विदेशियों को भी अपनों जैसा स्नेह दिया है । क्योंकि भारत ही एक ऐसा देश है जो कह सकता है ‘वासुदेवः सर्वम्’ और किसी देश, किसी धर्म, किसी संस्कृति, किसी मजहब में मैंने ऐसा नहीं देखा जो इस वासुदेव की भावना से सेवा व समाजोत्थान के कार्य करे । अरे, भारत में गरीब, दुःखी, अनाथ, असहाय लोगों को भी गरीब कहकर उसका अपमान नहीं किया जाता अपितु दरिद्रनारायण कहकर उसका सम्मान किया है । जिस देश ने दरिद्रों में नारायण की भावना रखकर उनकी पूजार्थ उनकी सेवा का बीड़ा उठाया है, क्या उसी संस्कृति के संत, उसी संस्कृति से पोषित लोग किसीको पीड़ा पहुँचा सकते हैं ? अरे, मैं अपनी बात कहूँ तो मेरी माँ ने भी मुझे बचपन से ही एक चींटी पर भी पाँव रखने से मना किया । उनका बचपन से ही यह कहना था कि चीटीं में भी भगवान की चेतना है । एक चींटी को भी नुकसान न पहुँचा सकनेवाली संस्कृति के संत क्या किसीकी हत्या का काम करवा सकते हैं ? और संत भी ऐसे जो पग-पग पर समाज के उत्थान व समाज की उन्नति का कार्य कर रहे हैं, जिनके श्वास-श्वास भी समाजोत्थान के कार्य में समर्पित हैं !

 

आज देश को जरूरत है जुड़ने की, एकजुट होकर हमारे देश व हमारी परदुःखकातरता को समझनेवाली संस्कृति की रक्षा करने की । क्या चाहता है यह विश्व आज ? अशांति, दुःख, आतंकवाद, बम धमाके, अश्लीलता, शोषित समाज, गोलीबारी या फिर से तृतीय विश्वयुध्द ? अरे भाई ! बम धमाके, गोलीबारी या युध्द अथवा अश्लीलता से अगर शांति, अमन का साम्राज्य हो जाता या समाज जुड़ सकता तो प्रथम विश्वयुध्द में ही पूरी पृथ्वी के सभी धर्म व मजहब के लोग एक हो गये होते । आतंकवाद, बम धमाके, गोलीबारी, अश्लीलता समाज को तोड़ने का एक ऐसा घातक प्रयत्न है जो कभी भी अमन, शांति व सुख से ना खुद रह सकता है, न किसीको सुखी देख सकता है । पर एक संस्कृति है जो आज भी सुख से रह सकती है, अमन से जी सकती है, सभ्यता और संयम की शिक्षा से ओतप्रोत हो समाज को भी उन्नत कर सकती है । जिसका प्रारंभ से ध्येय ही रहा है ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः।’

 

हिन्दुस्तानियों ने सबको अपना माना है, सबसे प्रेम किया है, सबके सुख की भावना की है । क्या वे कभी किसी को दुःख पहुँचा सकते हैं ! नहीं, कभी नहीं, कभी भी नहीं !! तो फिर इसी संस्कृति पर इतना अत्याचार क्यों ? इसी संस्कृति को तोड़ने का प्रयास क्यों ? इसी संस्कृति का प्रतिनिधित्व करनेवाले संतो पर ही ऐसे झूठ आरोप क्यों ? क्या बिगाड़ा है संतों ने समाज का ? वे तो विश्वमंगल और भाईचारे को ही बढ़ावा देते हैं, समाज को जोड़ते ही हैं, तोड़ते नहीं । 

जरा सोचो ः- अरे जिनकी एक आवाज पर सैकड़ों नहीं, हजारों नहीं, लाखों नहीं, करोड़ों-करोड़ों भक्त अपना सिर काटकर रख देने को तैयार हैं, ऐसे संत आज क्यों चुप हैं ? क्यों चुप हैं उनके अनुयायी ? क्या वे कायर हैं ? नहीं, अरे याद रखना, जिस दिन भड़के, उस दिन पूरे देश में ही नहीं, पूरे विश्व में त्राही-त्राही हो सकती है । परंतु यह नहीं सिखाया संत आसारामजी ने अपने भक्तों को । उन्होंने तो सिखाया है ः ‘सबका मंगल, सबका भला’ । 

ऐसे झूठे आरोप लगानेवालों को देखकर क्या उनके शिष्यों का दिल नहीं फटता होगा ? अरे ! आग उगलता है – आग !!! 

मत छेड़ो शेर की दहाड़ों को, 

चीर-फाड़कर रख देंगी ।

मत छेड़ो आग की लपटों को, 

जलाकर राख कर देंगी ॥

ललकारो मत ज्वालामुखी की ज्वालाओं के भभकारों को, 

क्या जाने ये उगलती, 

सैलाब सबको राख कर देंगी ॥

संत तो संत हैं । जिन्होंने कभी किसीका बुरा नहीं चाहा । अरे इतना होने के बाद भी संत आसाराम बापू ने कभी किसीके लिए अपने सत्संग में एक अपशब्द भी नहीं कहा । अरे किसीका नाम लेकर गुमराह करने की कोशिश तो दूर, कभी समाज को इसका एहसास तक नहीं होने दिया । जाकर देखो उनके आश्रमों में, उनके हाल ही में हुए सत्संगों में, उनके सान्निध्य में… अभी भी वही शांति, वही आनंद, वही विश्व-मांगल्य की भावना ! क्या है उनका हृदय ! क्या है उनकी संतताई ! क्या है उनके हृदय की भावना ! 

कभी बालकों की बलि का आरोप, कभी तांत्रिक गतिविधियोें का आरोप, कभी झूठे चारित्रिक आरोप, कभी उनके द्वारा चलाये जा रहे महिला उत्थान आश्रम पर आरोप और अब तांत्रिक को सुपारी देने का आरोप… । कैसे झूठे, गंदे, बोगस आरोप लग रहे हैं ! अरे पथभ्रष्ट मित्रों ! जरा ये तो सोचो कि तुम अपने ही जाल में खुद फँसे जा रहे हो, संत को बदनाम करने की कोशिश में आप खुद अपने झूठ का पर्दाफाश कर रहे हो । आपके ये झूठे वाक्य, झूठे शब्द ही आपके कहे पहले के सभी झूठों पर पानी फेर देते हैं । बापू के आश्रमों को सी.आई.डी. एवं एफ.एस.एल. टीम की जाँच के बाद डी.आई.जी. श्री जी.एस. मलिक ने मीडिया को जानकारी देते हुए कहा ः यहाँ सामान्य वैदिक पूजा का ही सामान है, ऐसा कोई तांत्रिक का कुछ नहीं।’ इतना होने पर भी कुछ पैसे के लालची मिडियावालों ने सत्य प्रसारित करने के बजाय नित्य झूठ ही प्रसारित किया । अरे जब सी.आई.डी. ने सत्य सामने किया तो इन षड्यंत्रकारियों से फिर भी रहा नहीं गया क्योंकि उन्होंने संस्कृति व संतों को बदनाम करने का ठेका जो उठाया है । पर कहा जाता है कि चोर कितनी भी चतुराई से चोरी करे पर कोई निशान छोड़ ही जाता है। इसी तरह ये नया झूठ कि ‘बापू ने तांत्रिक को सुपारी दी’- इस झूठ ने पूर्व में प्रचारित सभी झूठी बातों पर पानी फेर दिया । मान लो, ऐसी झूठी बातों को अगर आप सच कहते हैं तो जरा ये तो देखो कि आसाराम बापू को आपने साफ सिध्द कर दिया कि बापूजी और आश्रम किसी भी तांत्रिक गतिविधि से अलग हैं क्योंकि अगर आश्रम और बापूजी तांत्रिक होते तो दूसरे तांत्रिक को सुपारी क्यों देते ? इस तरह षड्यंत्रकारी खुद की ही बातों को खुद ही के मुँह से झूठा साबित कर देते हैं और जब उनके पिछले सभी झूठ विफल हो गये तब इस झूठ में कितना सत्य होगा यह सभी पाठक स्वयं ही समझ सकते हैं ।

आसाराम बापू के तो अनेक गुरुकुल चलते हैं, जिनमें हजारों की संख्या में बच्चे पढ़ते हैं । हजारों-लाखों समर्पित साधक समाजोत्थान, विश्व-मंगल के लिए उनके आश्रमों में रहते हैं। गरीब, बेरोजगार लोगों के लिए उनके द्वारा चलाये जा रहे नित्य मुफ्त ‘भजन करो, भोजन करो और 30 रुपये भी ले जाओ’, राशन कार्ड द्वारा मुफ्त अनाज व सामान्य जरूरत की वस्तुओं, उनके द्वारा अकाल पीड़ितों, बाढ़-पीड़ितों, भूकम्प-पीड़ितों व दरिद्रनारायणों, पिछड़ी जातियों के भील लोगों को निःशुल्क शिक्षा, भोजन, सामान्य जरूरत की वस्तुएँ तथा मकान भी निःशुल्क ही दिये जाते हैं । न जाने कितनों का पालन करते हैं बापू ! ऐसे लाखों-लाखों के पालनहारे, करोड़ों को मार्गदर्शन देकर समाज को उन्नत करनेवाले आसाराम बापू क्या किसीके लिए ऐसा घृणित सोच भी सकते हैं ? अरे बोलनेवालों ! जरा-सी तो सामान्य मति रखो कि कब, क्या और किसके लिए बोलना चाहिए । अब अगर इतने पर भी बापूजी समाज को शांति बनाये रखने के लिए कह रहे हैं तो समाज खुद ही विचार करे कि बापू समाज व विश्व का मंगल चाहते हैं कि नहीं ?

मैं तो एक छोटी-सी सलाह देना चाहूँगा ः-

अगर समझ है इतनी भी, 

तो जरा ऑंख उठाकर देख ले ।

उगता सूरज रोज यहाँ, 

उल्लू की नजर मिटाकर देख ले ॥

चमगादड़ और निशाचरों के, 

लिए प्रभात नहीं होती ।

कौवे और कुत्तों में कोयल सी,

मिठास नहीं होती ॥

ऑंखें खोलकर पढ़ो जरा, 

इतिहास और पुराणों को ।

निंदा करनेवालों की, 

कभी जयकार नहीं होती ॥

कभी भूलकर मत छेड़ो तुम, 

इन ईश्वर के प्यारों को ।

आतंक मचानेवालों की तो, 

राख भी आज नहीं होती ॥

याद रखना कि अगर, 

आपने छेड़ा उनके शिष्यों को ।

तो प्रकृति माता में भी, 

ज्यादा बर्दाश्त नहीं होती ।

ज्यादा बर्दाश्त नहीं होती ॥

- नरेश कुमार छाबड़ा


आसाराम बापू के समर्थन ने संत समाज की गर्जना

December 21, 2008

 

नासिक (विशेष ब्यूरो) तीर्थभूमि नासिक में विशाल हिन्दू महासभा का आयोजन भारत जागृति मोर्चा द्वारा किया गया था, जिसमें देश भर से संत महंत, महामण्डलेश्वर शिवसेना, बजरंगदल, विश्व हिन्दू परिषद आदि अनेकों संगठनों के कार्यकर्ताओं को आमंत्रित किया गया । मंच के प्रमुख केन्द्रबिन्दु थे म हामण्डलेश्वर आचार्य श्री सुनील शास्त्रीजी महाराज, पूर्व ईसाई मिशनरी प्रचारक फादर रॉबर्ट सोलोमन (वर्तमान में डॉ. सुमन कुमार), हिन्दू जागरण मंच, प्रदेश प्रमुख, झारखंड, संत आसाराम बापू के कृपापात्र शिष्य सुरेशानंदजी महाराज, मौनी शांतिगिरिजी महाराज, स्वामी परमात्मानंद हरिद्वार वाले, महाचैतन्य बापू, महंत ज्ञानेश्वरानंद गिरी महाराज आदि । कार्यक्रम का सीधा प्रसारण ‘जी जागरण’ चैनल के माध्यम से किया गया । 

आचार्य सुनील शास्त्रीजी ने अपने क्रांतिकारी विचारों से सभा को सम्बोधित करते हुए कहा कि मेरे पास इतने सारे सबूत व सवाल हैं कि जो आरोप हिन्दू संतों व भारतीय संस्कृति पर लगाये जा रहे हैं, उनका खंडन मैं पत्रकार बंधुओं (मीडिया) को दे सकता हूँ । अनेक हिन्दू साधु-संतों के खिलाफ लगातार षड्यंत्र किये जा रहे हैं, हिन्दू मंदिरों का अधिग्रहण किया जा रहा है । माँ भारती अपने पुत्रों से पुकार-पुकार कर कह रही है कोई शिवा, सरदार वल्लभभाई पटेल, महाराणाप्रताप पैदा हो जो देश के गद्दारों से लड़ सकें ।

संत आसाराम बापू पर लगाये जा रहे आरोपों को लेकर शास्त्री ने कहा कि बापू पर जितने भी आरोप लगाये गये हैं उनका मैं स्पष्टीकरण मीडिया को देने के लिए तैयार हूँ । यदि दम है तो मेरे जवाबों को मीडिया प्रसारित करे ।

आसाराम बापू के शिष्य श्री सुरेशानंदजी ने वैदिक मंत्रों के उच्चारण द्वारा अपना वक्तव्य प्रारंभ किया । उन्होंने कहा संत कँवरराम को क्यों गोली मारी गयी ? नानक, बुध्द, कबीर आदि अनेक संतों ने समाज का क्या बिगाड़ा था जो निंदकों ने उनकी निंदा की ? निंदकों को तो कोई नहीं जानता है, संत आज भी पूजे जा रहे हैं। इन निंदकों की चिंगारी भक्तों के भक्तिरूपी समुद्र को क्या नुकसान पहुँचा सकती है ? अफवाहों के बादल श्रध्दारूपी भावना की हवा से उड़ जाते हैं । ये निंदक भक्तों की भक्ति को कभी हिला नहीं सकते । सभी भक्तों की ऑंखों से ऑंसू बह निकले । संतों पर विघ्नसंतोषी क्यों बार-बार निंदा के बादल बनाते हैं ? सूर्य को उल्लू क्या कभी देख पाता है? 

महा प्रभुराम चैतन्य ने अपने हृदय की पीड़ा को प्रकट करते हुए बताया कि हमारे संत अपने एकांत का त्याग करके हमें शांति प्रदान करनेवाला सत्संग प्रदान करते हैं किंतु तथाकथित कुछ निंदक ऐसे संतों पर झूठे आरोप लगाने का दुस्साहस कर रहे हैं जिसे हम सहन नहीं करेंगे ।

डॉ. सुमनजी ने अपना परिचय देते हुए बताया कि मैं भारत में ईसाई धर्म के प्रचार हेतु आया था किंतु यहाँ की संस्कृति व संतों के साथ रहकर मैंने जाना कि वास्तविक शांति तो केवल हिन्दू धर्म में है । अतः आप सभी मुझे मेरे पूर्व-अपराधों को क्षमा कर अपने हिन्दू भाई के रूप में स्वीकार करें । डॉ. सुमन ने आगे कहा कि 

बड़ी मुश्किल से मिली है आजादी,  इसे हम खोने नहीं देंगे ।

और देश में रह रहे गद्दारों को हम चैन से सोने नहीं देंगे ॥

आसाराम बापू पर लगाये गये आरोपों को लेकर सुमन ने कहा कि ये षड्यंत्रकारी पूतना की औलादें हैं जो जनता को मीडिया द्वारा सत्यता नहीं बल्कि भ्रामक प्रचाररूपी दूध पिलाने का कार्य कर रहे हैं । 

सभा के वक्ताओं के क्रांतिपूर्ण व संतों के खिलाफ चलाये जा रहे षड्यंत्रों की पोल खोल देनेवाले वक्तव्यों का प्रभाव तब देखने को मिला, जब बार-बार ‘सीधा प्रसारण’ बंद करने हेतु ‘जी जागरण’ पर दबाव डाला गया। संतों के वचनों को सुनने के लिए दूर-दूर से इतनी भीड़ आयी कि मंडप छोटा ही पड़ता गया । दोनों दिन भीषण बारिश के बावजूद सभी मंत्रमुग्ध होकर वक्ताओं को सुनते रहे। महाराष्ट्र सरकार द्वारा 135 जिले अकालग्रस्त घोषित किये गये थे किंतु नासिक में संतों के चरण पड़ते ही बारिश चालू हो गयी, जिससे लोगों में विश्वास और उत्साह-प्रसन्नता छा गयी । संतों के प्रभाव एवं परमात्मा की प्रत्यक्ष कृपा को सबने महसूस किया । 

पूरे महाराष्ट्र के अखबारों ने कार्यक्रम का कवरेज विस्तृत रूप से दिया । ‘भारत माता की जय’, ‘जय जय श्रीराम’ के जयघोष से सारा वातावरण गूँज उठा ।


आसाराम बापू का तंत्र मंत्र वशीकरण

December 21, 2008

 

 सूरत का जन्माष्टमी कार्यक्रम… आसाराम बापू के आश्रम में साधकों की पहले से भी ज्यादा विशाल भीड़… पंडाल में दूर-दूर तक अलग-अलग राज्यों से आये श्रध्दालु भक्तजन और मटकीफोड़ कार्यक्रम !

इतना बड़ा कार्यक्रम हो तो पत्रकार न आयें ऐसा कैसे हो सकता है ? अलग-अलग चैनलों के पत्रकार विभिन्न समयों पर कवरेज हेतु वहाँ पहुँचे । दोपहर दो बजे रफ्तार न्यूज तथा स्टार न्यूज के पत्रकार जिस समय मटकीफोड़ कार्यक्रम शुरू होने लगा था, पहुँचे, तो स्टार न्यूज व रफ्तार न्यूज के पत्रकारों ने संत आसारामजी बापू से कुछ सवाल पूछे।

स्टार न्यूज के पत्रकार ने एक प्रश्न यह पूछा कि ऐसा क्या है, जो भी आता है बापू का बन जाता है ?

बापू बोले ः हाँ, मेरे पास वशीकरण है। जो भी मेरे पास आता है, मेरा हो जाता है । सच बोलता हूँ, मेरे पास वशीकरण है । आज से 10 साल पहले ऐसा आरोपवाद चला था। फिर किसी डॉन को हायर किया गया मेरे को उड़ाने के लिए… सुपारी दी… और वो आया तो बोला कि महाराज! मुझे आपके लिए सुपारी मिली है… अब मैं आपको नहीं मारूँगा… फिर उनको जाकर बोला कि ऐसे फकीर के लिए तुम बोलते हो… मैं शाह आलम में रहता हूँ, ये बाबा मोटेरा में रहते हैं। ये उँचे फकीर हैं, तुम मेरे को कहाँ भेज रहे थे… तो सुपारी देनेवालों ने कहा कि बापू के पास क्या है ! जिसको सुपारी देकर भेजा वह भी उनका भक्त बन गया। शाहआलम टोलनाका का कोई डॉन था… तो मेरे पास वशीकरण है और वशीकरण मंत्र ‘प्रेम’ का… मेरे हृदय में सबके लिए प्रेम की, हित की धारा बहती है जैसे कृष्ण के हृदय में बहती थी…।

स्टार न्यूज के पत्रकार ने एक और प्रश्न पूछा : जो आरोप लगाते हैं, उनको आप क्या कहना चाहते हो?

बापू बोले : …. जो आरोप लगाते हैं, मैं उनको बोलूँगा कि मेरे नजदीक आओ और मेरे में जो भी दोष देखो, वे बताओ, मैं आपको इनाम दूँगा। भाई ! मुहम्मद पर ऐसे आरोप लगे कि मक्का से मदीना जाना पड़ा…. कबीर पर इतने आरोप लगे कि राजदरबार में बंदी होकर जाना पड़ा…. नानकजी को स्वार्थी, बिकाऊ मूर्खों ने इतने आरोप लगाये कि नानकजी को जेल में जाना पड़ा…. रहिदास पर ऐसे आरोप लगे कि मुहम्मद तुघलक की जेल में जाना पड़ा… नामदेव पर इतने आरोप लगे कि पैरों में जंजीर, हाथों में हथकड़ियाँ…. 

ये महापुरुषों के जीवन में उतार-चढाव आते रहते हैं और हमारी संस्कृति को चमकता हुआ देखने में जिनको पीड़ा होती है, वे लोग आयोजन करते हैं, खर्चा करते हैं और आरोप लगाते हैं और आरोपों में दम नहीं निकलता…. तांत्रिक, तांत्रिक, तांत्रिक….. अब जो आदमी गुनहगार नहीं है उस पर ऐसा गुनाह बोलने से उसका मनोबल बढ़ता है। 

अब यदि संत आसाराम बापू के उत्तर को सुनें, जो कि स्टार न्यूज के पत्रकार द्वारा लिया गया और स्टार न्यूज पर प्रसारित भी किया गया, तो स्पष्ट पता चलता है कि वे बोल रहे हैं कि मेरे पास वशीकरण है और वशीकरण मंत्र प्रेम को है । संत तुलसीदासजी ने भी इस वशीकरण मंत्र के बारे में दोहा बोला है कि ः

तुलसी मीठे वचन ते, सुख उपजत चहुँ ओर,

वशीकरण यह मंत्र है,तजि दे वचन कठोर ॥

अब इस बात को स्टार न्यूज ने जान-बूझकर इतना ही दिखाया कि मैं वशीकरण जानता हूँ । इन्होंने पूरी बात का वर्णन न करते हुए केवल इसी वाक्य को बार-बार दोहराते हुए कहा कि ‘बापू आप ही अगर वशीकरण (तंत्र-मंत्र) करेंगे तो लोग किस संत को मानेंगे ?’ 

एक सामान्य पाठक के लिए यह बात स्पष्ट है कि किस प्रकार भ्रामक प्रचार कर समाज को गुमराह किया जा रहा है । संत बोलते कुछ हैं और उसे जान-बूझकर तोड़-मरोड़कर दिखाया जाता है । इसका प्रत्यक्ष प्रमाण आपके सामने है । पाठकगण स्वयं ही इसका निर्णय करें क्या सही है, क्या गलत !!!

इस सदर्भ में एक बात और चौंकानेवाली है कि यह विडीयो इंडिया टी.वी. के पास कैसे पहुँची ? वह विडियो जो स्टार न्यूज के कैमरे में कैद थी, उसी एेंगल (कार्नर) से, वही-की-वही विडीयो इंडिया टी.वी. के पास पहुँच जाना इस बात को बिल्कुल स्पष्ट करता है कि स्टार न्यूज ने वह विडीयो इंडिया टी.वी. को बेच दी । प्रश्न यह है कि स्टार न्यूज द्वारा खींचा गया विडीयो या तो नोएडा के स्टार न्यूज कार्यालय से इंडिया टी.वी. ने खरीदा या फिर स्टार न्यूज के सूरत के पत्रकार ने इंडिया टी.वी. को वह विडीयो बेच डाला । यह एक ऐसा सच है जिसमें किसी भी प्रकार की कोई भी शंका या प्रश्न ही नहीं उठता । 

अब दूसरी बात यह है कि इंडिया टी.वी. के पास उपरोक्त पूरी विडीयो थी जिसमें संत आसाराम बापू ने ‘हाँ ….. मेरे पास वशीकरण है । जो मेरे पास आता है, मेरा हो जाता है, सच बोलता हूँ । मेरे पास वशीकरण है’ से लेकर ‘तो मेरे पास वशीकरण है और वशीकरण मंत्र प्रेम का’ कहा है। फिर जान-बूझकर संत आसाराम बापू की बात को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया । ऐसे पत्रकार, न्यूज प्रोड्यूसर वाकई प्रेस के नाम पर कलंक हैं । ऐसे लोगाें को प्रेस (मीडिया) में काम करने का कोई अधिकार होना ही नहीं चाहिए । स्टार न्यूज तथा इंडिया टी.वी. की मैनेजमेंट को चाहिए जो न्यूज प्रोड्यूसर इस तरह के झूठे समाचार बनाकर प्रसारित कर रहे हैं, तथा उनकी प्रतिष्ठा को दर्शकों की नजरों में नीचा गिरा रहे हैं, उन्हें तुरंत नौकरी से बाहर निकाल दें, ताकि टी.वी. चैनलों की प्रतिष्ठा लोगों में कम न हो ।


आसाराम बापू पर अघोरी सुखाराम के आरोपों की सच्चाई

December 21, 2008

‘मैं अघोरी हूँ, मंत्र-तंत्र और तांत्रिक विधियाँ जानता हूँ, मुझसे पंगा मत लेना, जलाकर रख दूँगा…’ – ऐसे शब्दों का प्रयोग कर कहीं गाँव के भोले-भाले किसानों की जमीनों पर कब्जा, कहीं सरदार सुखविन्द्र सिंह बनकर अपहरण की वारदातें, कहीं सुक्खा बनकर भोली-भाली लड़कियों के साथ… … …, कहीं हरविंदर सिंह कहकर महिलाओं से ठगी, तो कहीं विदेश की सरकार को भी मैरिज ब्रोकर आदि आदि कहकर फँसानेवाला आखिर कौन है ये ? क्या है इस तांत्रिक अघोरी की हकीकत ? किस तरीके से देता है ये भोले-भाले लोगों को धमकियाँ ? क्या है इसका धंधा ? कैसे करता है ये ठगी के धंधे ? आइये जानते हैं प्रेस की ताकत के विशेष ब्यूरो की रिपोर्ट के जरिये से…

अघोरी सुक्खा राम उर्फ ठग सुखाराम उर्फ सुक्खा उर्फ सुखविन्दर सिंह उर्फ प्रीस्ट सुखविन्द्र सिंह उर्फ हरविंदर सिंह

अमदावाद (प्रेस की ताकत) अघोरी तांत्रिक जो दर-दर चैनल-चैनल, अखबार के अलग-अलग कार्यालयों में मारा-मारा, भागा-भागा फिरता है और अपना नाम बताता है सुखाराम तांत्रिक, वास्तव में यह सुखाराम है ही नहीं ।

कुछ ही महीनों पूर्व से औघड़ सुखाराम मध्य प्रदेश के देवास के पास क्षिप्रा नदी के किनारे महाकाली मंदिर के एक छोटे-से कमरे में रहता है । अब हम खोल रहे हैं सुखाराम की नग्न, घिनौनी, अश्लील हकीकत । अब हम आपको बतायेंगे कि कैसे यह एक शहर से दूसरे शहर लोगों को ठगकर भाग जाता है और शुरू करता है फिर एक नये ठिकाने से लोगों को ठगने की नई कवायत… !

क्षिप्रा गाँव के लोगों का कहना है कि ये बाबा पिछले कुछ ही महीनों से मंदिर में रह रहा है और अपने आपको मंत्र-तंत्र विद्या का जानकार बताकर और इस विद्या से वह कुछ भी कर सकता है इस प्रकार कहकर देवास क्षिप्रा के इर्द-गिर्द के कई इलाकों के लोगों से प्रेम-विवाह, व्यापार चलाने, विदेश भेजने, जादू-टोने का असर दूर करवाने के नाम पर हजारों रुपये ठग चुका है ।

इतना ही नहीं, यह औघड़ बाबा तो अपने तंत्र-मंत्र से लोगों को डरा के जमीनों पर कब्जे करवाने में भी माहिर है । यह औघड़ जिला शाजापुर की तहसील नलखेड़ा के गुदरावन गाँव के राधेश्याम, नगजीराम, शिवनारायण आदि कृषकों की जमीन किसी फैक्ट्रीवाले से पैसे लेकर कब्जा करवाने की कोशिश में इनके खेतों में घुस गया और जातिसूचक गंदी-गंदी गालियाँ बकने लगा और कहने लगा कि आप यह खेत खाली कर दो, नहीं तो मैं मंत्र-तंत्र से तुम सबको तबाह कर दूँगा और अघोरी तथा उसके साथियों ने धमकियाँ देकर उन्हें भगा दिया व सारी जमीन की फसल खराब कर दी । इस सारी घटना से दुःखी होकर इन लोगों ने पुलिस थाना नलखेड़ा में दिनांक 8 मार्च 2008 को अघोरी के विरुध्द कार्रवाई करने हेतु आवेदन भी दिया । 

यह ठगी पहली जगह नहीं हुई है । ये अघोरी महाराज इससे पूर्व कुछ समय आस्ट्रेलिया में भी रहकर आये हैं और वहाँ पर गुरुनानक सिक्ख टेंपल, 13 रिवर स्ट्रीट, वूलगुलगा, एन.एस.डब्ल्यू.2456, आस्ट्रेलिया के पते पर विराजनेवाले ये औघड़ बाबा वहाँ प्रीस्ट सुखविन्द्र सिंह थे वहाँ पर भी इनके काफी चर्चे रहे ।

यही नहीं, वहाँ पर इसने प्रीस्ट ग्यानी सुखविन्द्र सिंह के नाम से विजिटिंग कार्ड भी छपवाया और उस पर वहाँ के दो फोन नम्बर तथा अपनी शिक्षा पीएच.डी. (तबला) के अतिरिक्त मैरिज सैलीब्रैंट भी छपवाया । कहने का तात्पर्य कि यह अघोरी वहाँ प्रीस्ट ग्यानी इस नाम से शादियाँ करवाने का काम करता था या इसको यूँ कहें कि कबूतरबाजी करता था तो नाजायज नहीं होगा ।

आस्ट्रेलिया की कहानी भी काफी लम्बी-चौड़ी है । लोगों को इस पर ऐसा भी शक है कि इसे आस्ट्रेलिया की सरकार ने देश निकाला दे दिया था । यह अघोरी जो पंजाब के तरनतारन में सुक्खा के नाम से जाना जाता है, इसने तीन-चार वर्ष पूर्व जयपुर के प्रीतपाल सिंह के तथा उसके पुत्र तथा रिश्तेदार से 60,000/- रुपये तथा 1,50,000/- रुपये आस्ट्रेलिया ले जाने के नाम पर ऐठें थे । पूर्व-निर्धारित योजना से पैसे जेब में डालकर उनको दिल्ली हवाई अड्डे पर ले जाकर छोड़ दिया और खुद आस्ट्रेलिया के जहाज में चढ़कर आस्ट्रेलिया चला गया और वे देखते ही रह गये ।

इस ठग ने तीन वर्ष पूर्व मुरादाबाद में भी कुछ लोगों के साथ ठगी की थी । मांस, मदिरा के शौकीन इस ठग ने मिलनविहार, बुध्दविहार, दीवान का बाजार निवासी महिलाओं को ठगा और रफुचक्कर हो गया जिसकी उन्होंने पुलिस में रिपोर्ट भी दर्ज करवाई लेकिन उसका सही नाम पता न होने से पुलिस कोई कार्रवाई नहीं कर सकी । लेकिन जैसे ही मुरादाबाद रह रहे इन लोगों ने इसे इंडिया टीवी पर देखा तो फिर से पुलिस को बताया कि यह शख्स वही ठग है, इसके विरुध्द कार्रवाई करें। 

यही नहीं, दिल्ली के पहाड़गंज पर स्थित पहलवान होटल जो कि मांस (खरोड़े) इत्यादि बेचते हैं, के मालिक श्री कीमतीलाल का कहना है कि यह जब भी दिल्ली में होता है तो रोज हमारे यहाँ शाम को मांस (खरोड़े) खाने आता है । इसको मेरे 7-8 नौकर भी पहचानते हैं । 

इतना ही नहीं, डेढ़-दो वर्ष पहले नई दिल्ली के बुध्द विहार के ब्रह्म दरबार आश्रम में बाबा परमजीतसिंहजी के पास एक विदेशी लड़की को यह कहकर लेकर गया कि ‘यह मेरी पत्नी है, इसे पीलिया हो गया है । हम लोग आपके आश्रम में पीलिया का इलाज करवाने आये हैं ।’ ऐसा कहकर वे आश्रम में रहने का स्थान माँग के कमरा लेकर रहने लगे । कुछ ही दिनों में वहाँ उसे अलग-अलग तरह के लोग मिलने के लिए आने लगे । तंत्र-मंत्र आदि प्रयोग के लिए लोग अघोरी बाबा को पूछने लगे । उन लोगों का कहना था कि अघोरी बाबा यहाँ रुके हुए हैं, उनसे मिलना है । तो बात संचालकों तक पहुँची । एक दिन तो बात की हद ही हो गयी, जब रात को सुखविंदर सिंह वहाँ के संचालक से बोला कि उसे कुछ अति आवश्यक ई-मेल वगैरे करने हैं, कुछ देर के लिए कम्प्यूटर चाहिए तो ब्रह्म दरबार के संचालक बाबा परमजीतसिंहजी ने उसे अपना कम्प्यूटर दे दिया । रात्रि को सुखविंदरसिंह ने अपना कुछ कार्य वगैरे किया । जब सुबह बाबा परमजीतसिंहजी अपना कम्प्यूटर खोलकर उसमें काम करने लगे तो रात्रि में सुखविंदरसिंह द्वारा खोली हुई कुछ वैबसाईट्स पर उनकी निगाह गयी । तो वे यह देखकर हक्के-बक्के रह गये कि सुखविंदरसिंह ने रात्रि में कई अश्लील फिल्मों की वैबसाईट्स खोली थीं !!! इस वजह से बाबा ने उसे तुरंत कार्यालय बुलवाया और कमरा खाली कर आश्रम से शीघ्र ही चले जाने को कहा । इस पर बाबा परमजीतसिंहजी के प्रति मन में गुस्सा लेकर वह उस विदेशी लड़की सहित, जिसे वह अपनी पत्नी बताता था, वहाँ से चला गया । 

कुछ ही दिनों बाद आश्रम में कुछ लोग आये और बोले कि हमारी बेटी बीमार है, यहाँ पर आने में असमर्थ है । हम चाहते हैं कि आप उसका इलाज घर चलकर करें । बाबा परमजीतसिंह अपने साथ आश्रम की पूजनीय माताजी तथा उनके भाई को लेकर, उन्हें लेने आये इन तीन-चार लोगों के साथ कार में यह सोचकर निकल पड़े कि ‘चलो, हमारे हाथों यदि किसी रोगी का रोग ठीक होता है तो हमें यह सेवाकार्य करने में कोई भी एतराज नहीं है ।’ लेकिन उन लोगों ने दिल्ली बाईपास से गाड़ी अम्बाला रोड की ओर मोड़ दी और बाबा परमजीतसिंहजी को बिल्कुल चुप बैठने के लिए कहा और धमकी देते हुए बोले ः ‘यदि आप लोगों ने जरा-सी भी आवाज निकाली तो आपको जान से मार दिया जायेगा ।’ लगभग डेढ़-दो घंटे लगातार चलने के बाद कार पानीपत के नजदीक हाईवे पर एक गुरुद्वारे में जाकर रुकी । वहाँ मौजूद था वही अघोरी, तांत्रिक सुखविंदरसिंह रिवाल्वर, तलवारों जैसे कई घातक हथियारों से लैस अपने साथियों सहित । वह उनसे बोला कि या तो वे उसे दो लाख रुपये दें अन्यथा उन्हें नहीं छोड़ा जायेगा । छः-सात घंटे लगातार बहस चलने के बाद इस शर्त पर बात निपट गयी कि वे आश्रम जाकर उन्हें दो लाख रुपये भेज देंगे । बाबा परमजीतसिंह आदि लोगों को छोड़ दिया गया परंतु बाबा द्वारा सुखविंदरसिंह को कोई पैसा नहीं दिया गया तो बार-बार सुखविंदरसिंह के धमकी भरे फोन आते रहे । लेकिन बाबा लगातार उसे पैसे न देने की बात करते रहे तो अंततः उसने बाबा को फोन करना छोड़ दिया।

ब्रह्मदरबार के बाबा परमजीतसिंहजी ने प्रेस की ताकत के पत्रकार से बात करते हुए कहा कि ‘हम इंडिया टी.वी. पर संत आसाराम बापू के बारे में इस तरह के आरोपों को सुनकर बहुत आहत हुए कि यह खतरनाक गुंडा किस-किस तरह से कई रूप बदलकर विभिन्न लोगों से ठगी करता है ।’ बाबा ने बताया कि जब यह व्यक्ति हमारे आश्रम में ठहरा हुआ था तो इसने पश्चिम विहार दिल्ली के एक सज्जन, जिनके बेटे की किसी दुर्घटना में मौत हो गयी थी, उनको अपने बेटे की आत्मा से बात करवाने का बहाना बनाकर हजारों रुपये ठगे थे । केवल यहाँ ही नहीं, पंजाब के आनंदपुर साहब की एक महिला जिसके पति इटली में थे, से भी इस ठग सुखविंदरसिंह ने हजारों रुपये एेंठ लिये थे । बाबा परमजीतसिंह ने बताया कि हम संत श्री आसाराम बापू पर लगाये जा रहे इस व्यक्ति के आरोपों से अत्यंत आहत हुए हैं और हम चाहते हैं कि इस व्यक्ति का असली चेहरा लोगों के सामने आना ही चाहिए । इस ठग को, जो अपने आपको तांत्रिक, अघोरी इत्यादि क्या-क्या कहता है, कानून के हवाले किया जाना अत्यंत आवश्यक है, ताकि यह खतरनाक आदमी अन्य लोगों को न ठग सके । 

इस ठग सुखविंदरसिंह उर्फ हरविंदरसिंह उर्फ सुखाराम उर्फ सुक्खा की कहानी यहीं खत्म नहीं होती, इस ठग ने जयपुर के गुरुद्वारा श्री गुरु नानक दरबार, जो कि जवाहर नगर में स्थित है, में आज से 25 वर्ष पहले मुख्य ग्रन्थी की सेवा भी की थी और वहाँ पर इस व्यक्ति ने अपना नाम ज्ञानी सुखविंद्रसिंह रखा हुआ था । प्रेस की ताकत को ऐसा भी मालूम हुआ है कि यह व्यक्ति वास्तव में पंजाब के तरनतारन जिले का रहनेवाला है । इस व्यक्ति ने जयपुर में ही मंजीत कँवर नाम की एक लड़की से शादी भी की थी जिसके बाद में दो बच्चे भी हुए । प्रेस की ताकत को ऐसा मालूम हुआ है कि शायद इस औरत की बाद में मृत्यु हो गयी या उसे मार दिया गया । उसके बाद इसने एक और शादी भी की, जिससे फिर दो बच्चे हुए । उसके बाद इसने फिर किसी विदेशी लड़की के साथ तीसरी शादी भी की है । अब बुध्दिजीवी पाठक इस व्यक्ति के बारे में इतना जानकर खुद ही निर्णय कर सकते हैं कि बापू और ठग सुखाराम उर्फ अघोरी सुक्खाराम उर्फ हरविंदरसिंह उर्फ सुखविंद्रसिंह उर्फ ज्ञानी सुखविंदरसिंह उर्फ सुक्खा का कोई रिश्ता हो सकता है क्या ? जो इंडिया टी.वी., स्टारन्यूज पर दिखाया गया वह सच हो सकता है क्या ? 

संतश्री आसारामजी बापू तथा इस ठग अघोरी के टेलीफोन की बातों के बारे में अब तो बुध्दि जीवी पाठक खुद ही समझ गये होंगे की यह कितना सच्चा होगा यह ठग पैसे के लिए क्या नहीं कर सकता पठकों को हमारी सलाह है कि यदि ऐसे अघोरी या ठग आपके निकट कहीं हो तो पुलिस को अवश्य सूचित करें ।  

www.hariomgroup.org/truth


Hello world!

December 21, 2008

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